Monday, November 28, 2016

आज के युग में क्षमा का औचित्य?

दुसरो की गलतियां गिनाना, उन्हें खरी खोटी सुनाना, सम्बन्ध तोड़ लेना, ये सब कितना सहेज है! ऐसा करने में हमें ज़रा भी वक़्त नहीं लगता मगर जब बात माफ़ करने की आती है तो हमारे ज़हन में हज़ारो सवाल कौंधने लगते है, कही क्षमा करने का उल्टा असर तो नहीं होगा? वह मुझे कमज़ोर तो नहीं समझेगा? भला अपना अपमान कैसे भूल जाऊ? आदि मगर ऐसी कितनी ही हस्तिया हुई है, जिन्होंने दुसरो को माफ़ करने में पलभर का भी वक़्त नहीं लगाया! अश्वेत नेल्सन मंडेला जी को ही ले लीजिये, दक्षिण अफ्रीका में असमानता और जाति भेद ख़त्म करने की लड़ाई में उन्हें सालो कैदखाने में रहना पड़ा! वहाँ के जेलर ने उन्हें कई तरह से प्रताड़ित भी किया, फिर भी जेल से छूटने के बाद उन्होंने सम्मान समारोह में जेलर को आमंत्रित करने के लिए सरकार पर जोर डाला था, इतना ही नहीं अपने समाज के लोगो से गोरो को माफ़ करने की गुज़ारिश भी की थी!
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जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति क्लिंटन ने नेल्सन मंडेला से पूछा की "क्या आपको अपने साथ हुए अनयाये पर क्रोध नहीं आया? तो उनका जवाब था, हाँ- मुझे क्रोध आया था, थोड़ा डर भी गया था, आखिर मैं लंबे समय तक आज़ाद जो नहीं हुआ था! लेकिन मैंने महसूस किया कि अगर मैं उनसे नफरत करता रहा तो जेल से बाहर आने के बाद भी वो मेरे साथ ही रहेंगे! जबकि मैं पूरी तरह से आज़ाद होना चाहता था! इसलिए मैंने इस घटना को भुला दिया, ये एक हकीकत है "दूसरे को क्षमा न करने का मतलब है, उसके साथ साथ खुद का नुकसान करना"
बदला लेने की प्रव्रत्ति व्यक्ति और समाज, किसी के लिए भी फायदेमंद नहीं, समझदारी क्षमा करने में ही है, क्योंकि दूसरो को सजा देने के क्रम में व्यक्ति को अपने हितो का भी गाला घोटना पड़ता है!
कैसी प्रतिकिर्या करते है आप?
आइये गौर करे ज़िन्दगी के उन लम्हो पर जब आपका दिल किसी के लिए नफरत और क्रोध से भर उठता है, तब क्या करते है आप और उससे क्या हासिल होता है?
खरी-खोटी सुनना - पहली प्रतिकिर्या तो यही होती है की आप उस बन्दे को जी भर के बुरा भला कह लेते है, लताड़ते है, क्रोध में चिल्लाते है, पर इससे हासिल क्या होता है? तनाव बढ़ता है, ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है! क्रोध के उफान में ही अक्सर हार्ट अटैक के दौरे भी पड़ जाते है! साथ ही जिस पर आप चिल्लाते है वह आपके प्रति दुर्भावना रखने लगता है!
रिश्ता तोडना - दूसरी प्रतिकिर्या होती है बातचीत बंद करना, मगर व्यवहारिक नज़रिये से देखा जाये तो इसमें भी घाटा आपका ही है! आज की दुनिया में कब कौन काम आ जाये, कहा नहीं जा सकता, जितने ज़्यादा लोगो से मधुर सम्बंध होंगे उतना फायदेमंद होगा, अब्राहम लिंकन ने ठीक ही कहा था, "एक गैलेन सिरके की जगह 1 बून्द शहद से ज़्यादा मक्खियां पकड़ी जा सकती है!" ज़ाहिर है रिश्तो में कड़वाहट बढ़ाने के बजाये क्षमा के शहद से मिठास घोलना ज़्यादा बेहतर है!
बदला लेना - कुछ लोग ताउम्र दूसरो को क्षमा नहीं करते और हमेशा बदले की फ़िराक में रहते है, ये भी एक तरह से घाटे का सौदा है! अक्सर बदला लेने के क्रम में व्यक्ति दूसरो के साथ-साथ खुद को भी बर्बाद कर लेता है, क्या इस तरह टाइम एनर्जी और लाइफ वेस्ट करने से बेहतर माफ़ करना नहीं?
घुटते रहना - दूसरो की कुछ बाते दिल को चोट पहुचती है, ऐसे ज़ख़्म तब नासूर बन जाते है जब आप रह रह कर उसे कुरेदते है या मन ही मन घुटते रहते है, इसका इलाज बहुत कठिन हो जाता है!
क्या करे -
क्षमा करे - दूसरो को माफ़ कर दे बेशक ये सहेज काम नहीं है, पर खुद के और समाज दोनों के हित में है! बकौल नेल्सन मंडेला "जब हम क्षमा करते है तो ये 3 तरह से काम करता है! पहला क्षमा करके हम अपनी वास्तविक पहचान बनाये रखते है, दूसरा समाज में एकता के प्रति संघठन की स्तिथि उत्पन करते है " तीसरा, युवा पीढ़ी के लिए एक आदर्श के रूप में सामाजिक मूल्यों को निरंतरता देना! क्षमा करने का ये अर्थ बिलकुल नहीं कि आप सामने वालो की नज़रो में छोटे या कमज़ोर हो गए, वस्तुतः क्षमा तो बड़प्पन और उदारता की पहली निशानी है! महात्मा गाँधी जी का अहिंसा का सिद्धान्त भी क्षमाशील से ही प्रेरित था!
कैसे करे क्षमा ? सबसे पहले ज़रूरी है, मन को शांत रखे, जब भी क्रोध आये तुरंत प्रतिकिर्या न करे! खुद को काबू रखने का प्रयास करे! हो सके तो उस स्थान या व्यक्ति से दूर हो जाये जिस पर आपको क्रोध आ रहा है!
कुछ देर के लिए अपने अहं को दरकिनार करते हुए, दूसरे के पक्ष में विचार करे, खुद को उसकी जगह रख कर देखे! बहुत से मामलो में आपको अहसास होगा कि उसकी परिस्तिथयो में अगर आप होते तो शायद आप भी वैसा ही करते, जैसा उसने किया! अक्स हम दूसरे की 1 गलती के आगे उसकी हज़ार खूबियों को भूल जाते है! याद करे जिस व्यक्ति ने आपको चोट पहुचाई है, पहले कई दफा वो आपके काम भी आया होगा तो क्या वो क्षमा का अधिकारी नहीं है! मन में यकीन रखे यदि आप सही है तो अंततः जीत आपकी ही होगी, भला फिर बाधा उत्पन्न करने वालो से कैसी दुश्मनी? सच तो ये है कि वो आपकी राह में रोड़े अटका कर आपको और समर्थ और मज़बूत बना रहे है! माफ़ करने की आदत बचपन से ही डालनी ज़रूरी है! घर और स्कूल में यदि बच्चो में शुरू से माफ़ करने कि आदत विसकसित की जाये तो आगे जा कर वे समाज को आदर्श रूप दे सकेंगे! क्षमा करने की प्रवित्ति हमारे मन को ईर्ष्या, द्वैश, क्रोध से मुक्त कर स्वछ बनाती है! जब हम किसी व्यक्ति को क्षमा करते है तो मनको उसके लिए निरंतर चलने वाली नकारात्मक भावनाओ के बोझ से मुक्त कर देते है! हम फ़िज़ूल ही अपनी क्रोध, नाराज़गी, शिकायत आदि पर अपनी ऊर्जा बर्बाद करने से बच जाते है और इस ऊर्जा का इस्तेमाल अपनी उन्नति और बेहतरी में कर सकते है! यदि कोई व्यक्ति आपके साथ बुरा करता है और आप उसके साथ वैसे ही करके निकलना चाहते है तो फिर आपमें और उसमे क्या अंतर रह जायेगा? किसी दूसरे की वजह से अपने आदर्श या अपनी पहचान बदलना क्या आपकी हार नहीं? दूसरो को क्षमा कर अपनी उदारता दिखाए मगर हाँ कभी स्वाभिमान को ठेस न पहुँचने दे!