Tuesday, February 7, 2017

Hindi story - samadhan(Last Part)

पिछले भाग मे आपने पढ़ा कामना राय जी ने विवाह समारोह मे हो रही गड़बड़ियो को पकड़ा अब उसके आगे -

मै आप को देखते ही डर गई थी और वहाँ पर मै अकेले नही थी! हम दोनो थे आप सेहरे से मुँह ढका होने के कारण इन्हे पहचान नही पाई थी चाँदनी ने अपने पति की ओर इशारा किया था! मेरी समझ मे अब भी कुछ नही आया! तुम्हारा अपने पति से विवाह करने का क्या मतलब है! चाँदनी ? हर समारोह मे ऐसा ही होता है, दीदी अधिकतर जोड़ो का पुनर्विवाह करवा देते हैं! मंगलसूत्र वैवाहिक परिधान आदि वापस ले लिए जाते है! दो चार जोड़ों की सचमुच शादी होती है, पर उनसे पैसे लिए जाते हैं चाँदनी के पति ने विस्तार से बताया था! पर इससे तुम्हे क्या लाभ होता है ? 
500 रुपये मिलते हैं साथ ही दावत मे बढ़िया खाना मिलता है हम ग़रीबों के लिए यही बड़ा आकर्षण है, चाँदनी रुआसे स्वर मे बोली थी! पर 4 दिन से तुम लोग थे कहाँ ? दीदी “वामा” के लोग हमे वहाँ से निकलते ही जीप मे बिठा कर ले गये थे आज हम बड़ी कठिनाई से निकल कर आए हैं ! वे लोग नही चाहते थे कि आपको या किसी और को इस संबंध मे कुछ भी पता चले! पता नही हमसे ऐसी क्या भूल हो गई कि यह लोग हमारे खून के प्यासे हो गए है! कुछ नही होगा तुम लोगो को “वामा”  समाज सेवको की संस्था है ! अपराधियों की संस्था नही है! 
पता नही दीदी हमारे जैसे ग़रीबो को तो अपनी परच्छाई से भी डर लगता है, अपने लालच के कारण ही हम इस झमेले मे पड़े हैं अब चाँदनी फूट फूट कर रो पड़ी थी! 
कामना राय ने उसे संतावना देने के साथ ही उसके परिवार के भोजन का भी प्रबंध किया था कामना को सबसे अधिक यही बात खाए जा रही ही थी कि उनकी सिफारिश के बल पर ही “वामा” नाम के संगठन को 2 वर्षों से लगातार मोटी रकम मिल रही थी! अतः उन्होने नगर मे होने वाले सभी सामूहिक विवाहों की जाँच के आदेश दिए थे! इस घटना को तीन माह भी नही बीते थे की राजनाथ जी पुन अपने 2 साथियों के साथ आ धमके थे! सामूहिक विवाह समारोह के नए निमंत्रण के साथ! पर इस बार उद्घाटन उनके करकमलो दुवारा नही बल्कि प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री महोदया दुवारा किया जाना था! 
आपका साहस कैसे हुआ पुनः ऐसे आयोजन मे मुझे आमंत्रित करने का एक-एक को जेल की हवा ना खिलाई तो मेरा भी नाम कामना राय नही! शान्ती, महोदया शान्ती, हम समाज सेवा करने निकलते हैं हमने कोई कच्ची गोलियाँ नही खेली हैं जाँच का डर आप किसी और को दिखाइएगा! हम तो मंत्री महोदया को सब विस्तार से बता चुके हैं कि कैसे हमारी संस्था को बदनाम करने के लिए आपने चाँदनी और उसके पति को हमारे समारोह मे भेजा था! विभाग मे मेरी साख क्या है? यह शायद आप नही जानती, कि बिना कुछ पाने की आशा के कोई विभाग या अफ़सर किसी संस्था की सहायता नही करता, राजनाथजी कुटिलता से मुस्कुराए थे! समारोह मे पधारिएगा अवश्य, कामना जी! आप के विभाग के मंत्री जी पधार रहे है! रही विभागीय जाँच की बात तो क्यूँ अपने पावो पर कुल्हाड़ी मारने की चेष्टा कर रही है, आप तो स्वय समझदार हैं आप चाहे तो समस्या का समाधान मिल बैठ कर भी किया जा सकता है! व्यंग्यपूर्ण स्वर मे बोल कर राजनाथजी बाहर निकल गये थे पर कामनाजी हतप्रभ बैठी रह गई थी!
समाप्त